Skip to main content

ayurvedic ras bhed kise kahte h

Ayurvedic ras bhed kise kahte h

रस के प्रकार

  • मधुर ( मीठा)
  • अम्ल ( खट्टा)
  • लवण (नमकीन)
  • कटु (चरपरा)
  • तिक्त (कड़वा, नीम जैसा)
  • कषाय (कसैला
  • रस क्या है

    कोई भी चीज जब जीभ के संपर्क में आती है तो उससे हमें जो अनुभव होता है उसे आयुर्वेद में रस कहा गया है। आम भाषा में इसे समझे तो कुछ भी चीज खाने पर हमें तो स्वाद महसूस होता है वही रस है।

     

    आयुर्वेद में खाने पीने की किसी भी चीज के फायदे इन रसों के आधार पर ही निर्धारित किये हैं। जिन चीजों में रसों की तीव्रता काफी ज्यादा होती है उन्हें ही औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। खाद्य पदार्थों की तासीर भी इन्हीं रसों के आधार पर तय की जाती है। जैसे मधुर रस वाली चीजों की तासीर ठंडी और अम्ल या कटु रस वाले खाद्य पदार्थों की तासीर गर्म मानी जाती है।

     

    रस के प्रकार 

    आयुर्वेद में 6 प्रकार के रसों के बारे में बताया गया है। रसों का ये प्रकार मूलतः स्वाद के आधार पर ही निर्धारित किये गए हैं। आयुर्वेद में निम्न 6 रस बताए गए हैं।

     

    1. मधुर ( मीठा)
    2. अम्ल ( खट्टा)
    3. लवण (नमकीन)
    4. कटु (चरपरा)
    5. तिक्त (कड़वा, नीम जैसा)
    6. कषाय (कसैला)

     

    इनमें सबसे पहला रस (मधुर) सबसे अधिक बल प्रदान करने वाला है और अगले रस अपेक्षाकृत क्रमशः कम बल प्रदान करने वाले हैं। इस क्रम से कषाय रस सबसे कम बल प्रदान करने वाला है।

     

    रस और पंच महाभूत

    हालांकि रस जल का स्वाभाविक गुण है, परन्तु जल में भी रस की उत्पत्ति (अभिव्यक्ति) तभी होती है, जब यह  महाभूतों के परमाणुओं के साथ संपर्क में आता है। अतः प्रत्येक रस में अलग-अलग महाभूतों की प्रधानता पाई जाती है, जो इस प्रकार है।

     

    रस

    महाभूत

    मधुर

    पृथ्वी और जल

    अम्ल

    पृथ्वी और अग्नि

    लवण

    जल और अग्नि

    कटु

    वायु और अग्नि

    तिक्त

    वायु और आकाश

    कषाय

    वायु और पृथ्वी

     

    प्रत्येक रस में पाये जाने वाले प्रमुख महाभूतों के अनुसार ही उस पदार्थ का व्यक्ति के शरीर में विद्यमान दोषों, धातुओं आदि पर प्रभाव पड़ता है।

     

    रस और दोष 

    रसों में अलग-अलग महाभूतों की अधिकता के अनुसार ही कोई एक रस, किसी दोष को बढ़ाता है तो किसी अन्य दोष को कम करता है। आइये इस बारे में और जानते हैं :

     

    रस

    किन दोषों को बढ़ाता है

    किन दोषों को घटाता है  

    मधुर

    कफ

    वात, पित्त

    अम्ल

    पित्त, कफ

    वात

    लवण

    कफ, पित्त

    वात

    कटु

    पित्त, वात

    कफ

    तिक्त

    वात

    पित्त, कफ

    कषाय

    वात

    पित्त, कफ

     

    आइये अब प्रत्येक रस के बारे में विस्तार से जानते हैं:

     

    1- मधुर रस 

    जिस रस को खाने पर संतुष्टि, ख़ुशी और मुंह में चिपचिपापन महसूस होता है। साथ ही जो रस पोषण प्रदान करता है और कफ बढ़ाता है उसे ही आयुर्वेद में मीठा या मधुर रस कहा गया है।

     

    मधुर रस के गुण

    मधुर रस से युक्त पदार्थ (औषधि और आहार द्रव्य) जन्म से ही अनुकूल होते हैं। अतः ये रस से शुक्र तक सभी धातुओं की वृद्धि करके व्यक्ति को बलवान बनाते हैं और उम्र बढ़ाते हैं। इनके सेवन से त्वचा का रंग में निखार आता है एवं पित्त और वात दोष शान्त होते हैं।

     

    मधुर रस वाली चीजें खाने से नाक, गला, मुंह, जीभ और होंठ चिकने और मुलायम होते हैं। ये शरीर को स्थिरता, लचीलापन, शक्ति और सजीवता प्रदान करते हैं। आमतौर पर मधुर रस वाले पदार्थ चिकनाई युक्त, ठंडे और भारी होते हैं। ये बालों, इन्द्रियों और ओज के लिए उत्तम होते हैं।

     

    दुबले-पतले कमजोर लोगों या और किसी बीमारी आदि से पीड़ित लोगों को विशेष रूप से मधुर रस युक्त आहार खाने की सलाह दी जाती है।

     

    मधुर रस के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान

    कई गुणों से युक्त होने पर भी मधुर रस वाली चीजों के सेवन से शरीर में कफ दोष बढ़ने लगता है। कफ बढ़ने के कारण निम्न रोगों की संभावना बढ़ जाती है :

     

    • मोटापा
    • आलस, सुस्ती
    • अधिक नींद आना
    • शरीर में भारीपन
    • भूख ना लगना
    • पाचन-शक्ति की कमी
    • प्रमेह (मूत्र सम्बन्धी रोग, मधुमेह आदि)
    • मुंह और  गर्दन आदि में मांस का बढ़ना
    • मूत्रकृच्छ्र (मूत्र का रुक-रुक कर या कठिनाई से आना)
    • खाँसी, जुकाम, जुकाम के साथ बुखार,
    • मुँह का मीठा स्वाद
    • संवेदना (sensation) की कमी
    • आवाज में कमजोरी, गले में सूजन व चिपचिपाहट
    • कंजक्टीवाइटिस (आंख आना)

     

    इसलिए मोटे, अधिक चर्बी वाले, मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को मधुर रस का सेवन कम से कम करना चाहिए तथा पेट में कीड़े होने पर भी इससे बचना चाहिए।

     

    मधुर रस वाले खाद्य पदार्थ

    आयुर्वेद में वर्णित- घी, सुवर्णि, गुड़, अखरोट, केला, नारियल, फालसा, शतावरी, काकोली, कटहल, बला, अतिबला, नागबला, मेदा, महामेदा, शालपर्णाी, पृश्नपर्णाी, मुद्गपर्णाी, माषपर्णाी, जीवन्ती, जीवक, महुआ, मुलेठी, विदारी, वंशलोचन, दूध, गम्भारी, ईख, गोखरू, मधु और द्राक्षा, ये सब मधुर द्रव्यों में मुख्य हैं।

    और पढ़ें: फालसा के फायदे व नुकसान

    अपवाद

    पुराना चावल, पुराने जौ, मूँग, गेंहूँ, शहद  मधुर रस वाले होने पर भी कफ को नहीं बढ़ाते। अतः आयुर्वेद में अन्न पुराना तथा घी नया खाने का विधान है।

     

    2- अम्ल रस 

    जिस रस का सेवन करने से मुंह से स्राव होता है। जिसे खाने पर आंखें और भौहें सिकुड़ती हैं और दांतों में खट्टापन महसूस होता है वो अम्ल रस होता है।

     

    अम्ल रस के गुण

    यह रस पदार्थ़ों को स्वादिष्ठ और रुचिकर बनाता है एवं भूख को बढ़ाता है। छूने पर यह ठंडा महसूस होता है। इसके सेवन से शरीर की ताकत बढ़ती है। अम्ल रस वाली चीजों के सेवन से मस्तिष्क अधिक सक्रिय होता है। यह ज्ञानेन्द्रियों को सशक्त बनाते हैं और शरीर को उर्जा देते हैं।

    अम्ल रस, भोजन को निगलने और उसे गीला करने में सहायक होता है और गति बढ़ाकर भोजन को नीचे की ओर ले जाकर भी पाचन क्रिया को बढ़ाता है। ज्यादातर कच्चे फलों में अम्ल रस पाया जाता है।

    और पढ़ें: पाचन शक्ति बढ़ने में धनिया के फायदे

    अम्ल रस के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान

    अम्ल रस का अधिक सेवन करने से पित्तदोष में वृद्धि हो जाती है। जिसके परिणामस्वरूप निम्नलिखित समस्याएं होने की आंशका बढ़ जाती है :

    • अधिक प्यास लगना
    • दाँतों का खट्टा होना
    • कफ का पिघलना
    • माँसपेशियों की टूट-फूट
    • दुर्बल शरीर वालों में सूजन
    • शरीर में कमजोरी
    • आँखों के सामने अन्धेरा छाना
    • चक्कर
    • खुजली
    • त्वचा के रोग
    • चोट या कटने आदि से होने वाले घावों का पक जाना व उनमें पस भर जाना
    • हड्डी का टूटना
    • गले, हृदय और छाती में जलन
    • बुखार

     

    अम्ल रस युक्त खाद्य पदार्थ

    आंवला, इमली, नींबू, अनार, चाँदी, छाछ, दही, आम, कमरख, कैथ और करौंदा आदि में अम्ल रस अधिक मात्रा में होता है।

     

    अपवाद

    अनार या अनारदाना और आंवला, ये अम्ल रस वाले होते हुए भी अम्ल रस से होने वाली किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचाते हैं।

     

    3- लवण रस

    जो रस, सेवन करने पर मुख से लार टपकाता है तथा गले और कपोल में जलन पैदा करता है, वह लवण रस कहलाता है।

     

    लवण रस के गुण

    लवण रस युक्त पदार्थ वात की गति नीचे करने वाले, चिपचिपाहट पैदा करने वाले और तीक्ष्ण पाचक होते हैं। ये अंगों की जकड़न, शरीर के स्रोतों (बॉडी चैनल) की रुकावट, जमी हुई चर्बी और मल पदार्थ़ों के अधिक संचय को दूर करते हैं। लवण रस वाले पदार्थ न बहुत अधिक चिकने, न अधिक गर्म होते हैं और न अधिक भारी होते हैं। लवण रस अन्य रसों के प्रभाव को कम कर देता है।

     

    लवण रस के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान

    अधिक मात्रा में लवण रस युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पित्त दोष के साथ रक्त भी असंतुलित हो जाता है। इस वजह से निम्न समस्याएँ होने की संभावना बढ़ जाती है:

    • अधिक प्यास और गर्मी लगना
    • जलन
    • बेहोशी
    • कुष्ठ या अन्य चर्म रोग से पीड़ित स्थान की त्वचा का गलना- सड़ना
    • मुंह पकना
    • नेत्रपाक
    • सूजन
    • त्वचा के रंग में विकार
    • शरीर के अंगों से रक्तस्राव
    • दाँतों का हिलना
    • विषैले लक्षण
    • पौरुषता में कमी
    • गंजापन
    • बालों का सफेद होना
    • झुर्रियां पड़ना
    • विसर्प (Erysipelas- एक प्रकार का चर्म रोग)
    • दाद
    • गठिया (gout)
    • अम्लपित्त (hyperacidity)
    • घाव बढ़ना
    • बल और ओज का नाश

     

    लवण रस युक्त खाद्य पदार्थ

    सेंधानमक, सौर्वचल नमक, कृष्ण, बिड, सामुद्र और औद्भिद नमक, रोमक, पांशुज, सीसा और क्षार, ये लवण रस वाले मुख्य द्रव्य हैं।

     

    4- कटु रस

    इस रस का सेवन करने पर मुंह में सुई चुभने जैसा दर्द महसूस होता है और जीभ के अगले हिस्से को उत्तेजित करता है। इसके अलावा यह आंख, नाक और मुंह से स्राव कराता है और कपोलों को जलाता है।

     

    कटु रस के गुण

    कटु रस वाले पदार्थ मुंह को स्वच्छ रखते हैं और शरीर में भोजन के अवशोषण में सहायक होते हैं। इनके सेवन से भूख और पाचन शक्ति बढ़ती है। ये आंख, कान आदि ज्ञानेन्द्रियों को ठीक प्रकार से कार्य करने योग्य बनाते हैं।

     

    कटु रस वाली चीजों के नियमित सेवन से नाक व आंखों से मल पदार्थों का स्राव और स्रोतों (बॉडी चैनल्स)  से चिपचिपे मल पदार्थों का निकास ठीक तरह से होता है।

     

    कटु रस का सेवन इन रोगों में है फायदेमंद :

    • मोटापा
    • शीतपित्त
    • आँतों की शिथिलता
    • कंजक्टीवाइटिस (Conjunctivitis)
    • खुजली
    • घाव
    • पेट के कीड़े
    • जोड़ों की जकड़न
    • गले के रोग
    • कुष्ठ
    • उदर्द
    • अलसक

    कटु रस युक्त पदार्थ कफ को शान्त करता है और जमे हुए रक्त का संचार करता है। कटु रस युक्त पदार्थ भोजन को स्वादिष्ठ बनाते हैं।

     

    कटु रस के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान

    कटु रस युक्त आहारों में वात और अग्नि महाभूत की अधिकता होती है। इन पदार्थों का अधिक सेवन करने से निम्न समस्याएं होने की संभावना रहती हैं :

    • बेहोशी
    • घबराहट
    • तालु और होंठों में सूखापन
    • थकावट
    • कमजोरी
    • चक्कर आना
    • पौरुषता, बल और वीर्य में कमी
    • हाथों, पैरों व पीठ में जलन और दर्द

     

    कटु रस युक्त खाद्य पदार्थ

    हींग, मरिच, पंचकोल (पिप्पली, पिप्पलीमूल, चव्य, चित्रक और शुण्ठी) तथा सभी प्रकार के पित्त, मूत्र और भिलावा आदि कटु रस वाले खाद्य पदार्थ हैं।

     

    अपवाद

    सोंठ, पिप्पली और लहसुन, कटु रस के अन्य पदार्थ़ों के समान ज्यादा हानिकारक नहीं होते।

     

    5- तिक्त (कड़वा) रस

    यह रस मुंह से लिसलिसेपन को हटाता है और जीभ को जड़ बनाता है।

     

    तिक्त रस के गुण

    तिक्त रस का स्वाद भले ही बुरा हो लेकिन यह अन्य पदार्थों को स्वादिष्ट और रुचिकर बनाता है। इससे भोजन में रूचि बढ़ती है। तिक्त रस वाले पदार्थ विषैले प्रभाव, पेट के कीड़ों, कुष्ठ, खुजली, बेहोशी, जलन, प्यास, त्वचा के रोगों, मोटापे व मधुमेह आदि को दूर करते हैं।

     

    ये वात का अनुलोमन (नीचे की ओर गति) करते हैं शरीर में रूखापन लाते हैं। अतः शरीर की नमी, चर्बी, मोटापा, मज्जा, पसीना, मूत्र तथा पुरीष को सुखाते हैं। इसके अलावा गले और यकृत् को शुद्ध करते हैं और कार्य करने में समर्थ बनाते हैं।

     

    तिक्त रस से नुकसान

    अधिक मात्रा में सेवन करने से तिक्तरस युक्त पदार्थ शरीर में रस (plasma), रक्त, वसा, मज्जा तथा शुक्र की मात्रा को कम कर देते हैं। इनसे स्रोतों में खुरदरापन और मुँह में शुष्कता, शक्ति में कमी, दुर्बलता, थकावट, चक्कर, बेहोशी, वातज रोग उत्पन्न होते हैं।

     

    तिक्त रस युक्त खाद्य पदार्थ

    पटोल, जयन्ती, सुगन्धबाला, खस, चन्दन, चिरायता, नीम, करेला, गिलोय, धमासा, महापंचमूल, छोटी और बड़ी कटेरी, इद्रायण, अतीस और वच : ये सब तिक्त रस वाले पदार्थ हैं।

     

    अपवाद

    गिलोय व पटोल तिक्त रस वाले होने पर भी हानिकारक नहीं होते।

     

    और पढ़ें: गिलोय के औषधीय गुण

     

    6- कषाय (कसैला) रस

    यह रस जिह्वा को जड़ (सुन्न कर देना) बनाता है और गले एवं स्रोतों को अवरुद्ध करता है।

     

    कषाय रस के गुण

    यह रस पित्त और कफ दोष को कम करता है। इसके अलावा यह अंगों से स्राव को कम करता है, घाव को जल्दी भरता है और हड्डियों को जोड़े रखने में मदद करता है। इसमें धातुओं और मूत्र आदि को सुखाने वाले गुण भी होते हैं। यही कारण है कि कषाय रस युक्त पदार्थों के सेवन से कब्ज़ की समस्या हो जाती है।

    कषाय युक्त पदार्थ त्वचा को स्वच्छ बनाते हैं। ये शरीर की नमी को सोख लेते हैं। आयुर्वेद के अनुसार कषाय रस  सूखा, ठंडा और भारी होता है।

     

    कषाय रस के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान

    कषाय रस वात को प्रकुपित करता है। अगर आप कषाय रस वाली चीजों का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं तो आपको निम्न समस्याएँ होने की आशंका बढ़ जाती है।

    • मुँह सूखना
    • हृदय में दर्द
    • पेट फूलना
    • बोलने में रुकावट
    • रंग का काला होना
    • पौरुष का नाश
    • अधिक प्यास लगना
    • शरीर में कमजोरी, थकावट
    • पक्षाघात
    • लकवा

    कषाय रस वाले खाद्य पदार्थ :

    हरड़, बहेड़ा, शिरीष, खैर, शहद, कदम्ब, गूलर, कच्ची खांड, कमल-ककड़ी, पद्म, मुक्ता (मोती), प्रवाल, अञ्जन और गेरू इत्यादि कषाय रस वाले खाद्य पदार्थ हैं।

    अपवाद

    कषाय रस युक्त होने पर भी हरड़ अन्य कषाय द्रव्यों के समान शीतल और स्तम्भक (मल आदि को रोकने वाली) नहीं होती।

Comments

Popular posts from this blog

Slow Streets Program to Help With Social Distancing

Slow Streets Program to Help With Social Distancing By With Muni service temporarily reduced during the COVID-19 health crisis, many San Francisco residents need to walk and take other modes of transportation to make essential trips. However, sometimes it is difficult to maintain 6’ of social distance on many sidewalks, park paths, and bikeways. This can be especially true when passing lines outside grocery stores and other essential services. Because of this, many pedestrians are choosing to walk in the street, exposing themselves to swiftly moving vehicle traffic. The SFMTA is implementing a new program, Slow Streets, to close some streets to through traffic and allow roadways to be used more as a shared space for foot and bicycle traffic. Throughout the city, corridors have been identified for Phase 1 Slow Streets. Beginning this week, some of these streets will be closed to through vehicle traffic to prioritize walking/biking and to provide more space for social distancing duri...

Weight Loss Success Stories: 6 People Share How They Shed Pounds with a High-Protein Diet

Weight Loss Success Stories: 6 People Share How They Shed Pounds with a High-Protein Diet Sarah:  Sarah, a 32-year-old mother of two, struggled with her weight after having her second child. She decided to try a high-protein diet and was able to lose 30 pounds in just three months. She replaced her breakfast with a protein shake, ate a salad with grilled chicken for lunch, and had fish or chicken with vegetables for dinner. Mike:  Mike, a 45-year-old man, had been overweight his entire life. He tried various diets, but none of them worked for him. He decided to give a high-protein diet a try and was able to lose 50 pounds in six months. He ate eggs, chicken, fish, and lean meats for most of his meals and limited his intake of carbohydrates and sugary foods. Emily:  Emily, a 28-year-old woman, had been struggling with her weight since her teenage years. She tried many diets and weight loss programs, but nothing seemed to work for her. She decided to try a high-p...

By The Numbers: The SFMTA’s COVID-19 Response

By The Numbers: The SFMTA’s COVID-19 Response By Erica Kato The COVID-19 pandemic has brought about unforeseen c hanges to San Francisco’s transportation network. And the impact of the crisis will continue to be felt city-wide long beyond the end of the public health emergency. On March 13, 2020, when it became clear that San Francisco needed immediate adjustments to the transportation system, Director of Transportation Jeff Tumlin launched SFMTA’s Department Operations Center (DOC) team. Since then, the DOC has served as a centralized hub to ensure that we are minimizing health risks to employees and the public as we keep transportation running, both by coordinating internally within the agency and by collaborating closely with our city, state, and federal partners to deploy resources and information in the most effective way possible. San Francisco's response to the COVID-19 pandemic included implementing temporary emergency transit lanes  Our COVID-19 response has chal...