क्या है एवैस्कुलर नेकरोसिस? जिसकी वजह से होती है हड्डियों की गंभीर बीमारी
एवैस्कुलर नेकरोसिस की वजह से हड्डियां घिसने लगती हैं और अंततः खत्म होने के कगार पर पहुंच जाती हैं। हड्डी घिसने या जोड़ों के अलग हो जाने के कारण उस हिस्से में रक्त आपूर्ति बाधित हो जाती है।

Avascular necrosis
इस बीमारी में दर्द मध्यम दर्ज का या बहुत तेज होता है और यह धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। कूल्हे के एवैस्कुलर नेकरोसिस होने पर पेड़ू, जांघ और नितंब में दर्द होता है। कूल्हे के अलावा इस बीमारी से कंधे, घुटने, हाथ और पैर के भी प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है।
एवैस्कुलर नेकरोसिस हड्डियों की एक ऐसी स्थिति है जिसमें बोन टिश्यू यानी हड्डियों के ऊतक मरने लगते हैं। इस तरह की स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब इन ऊतकों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता है। इसे ऑस्टियोनेक्रोसिस भी कहा जाता है। एवैस्कुलर नेकरोसिस की वजह से हड्डियां घिसने लगती हैं और अंततः खत्म होने के कगार पर पहुंच जाती हैं। हड्डी घिसने या जोड़ों के अलग हो जाने के कारण उस हिस्से में रक्त आपूर्ति बाधित हो जाती है। यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन आमतौर पर 30 से 60 वर्ष के बीच के आयु वर्ग के लोगों को यह अपनी गिरफ्त में ज्यादा लेती है। वैसे लोग जो काफी लंबे समय से ज्यादा मात्रा में स्टेरॉयड का इस्तेमाल करते हैं और ज्यादा शराब पीते हैं, उन्हें इस बीमारी के होने की संभावना अधिक रहती है। पी. डी. हिंदुजा नेशनल अस्पताल मुंबई में आर्थोपेडिक्स एंड ट्रामॉलोजी के हेड डा.संजय अग्रवाल आपको बताने जा रहे हैं इस रोग से जुड़े कुछ तथ्य।
लक्षण
लक्षण कई लोगों में शुरुआती दौर में इस बीमारी के कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। लेकिन जब स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो जाती है, तब वजन उठाने पर जोड़ों में दर्द होने लगता है। और अंततः स्थिति इतनी ज्यादा बिगड़ जाती है कि लेटे रहने पर भी जोड़ों में दर्द होता रहता है। इस बीमारी में दर्द मध्यम दर्ज का या बहुत तेज होता है और यह धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। कूल्हे के एवैस्कुलर नेकरोसिस होने पर पेड़ू, जांघ और नितंब में दर्द होता है। कूल्हे के अलावा इस बीमारी से कंधे, घुटने, हाथ और पैर के भी प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है। इनमें से किसी तरह के लक्षण दिखाई देने और जोड़ों में लगातार दर्द बने रहने पर तुरंत डाॅक्टर से दिखाने की जरूरत होती है।कारण
एवैस्कुलर नेकरोसिस होने के कई कारण होते हैं। जोड़ों या हड्डियों में चोट लगना: जोड़ें में किसी भी तरह का चोट या परेशानी जैसे जोड़ों का खुल जाना, की वजह से उसके नजदीक की रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।रक्त नलिकाओं में वसा का जमाव: कई बार रक्त नलिकाओं में वसा का जमाव हो जाता है, जिससे ये नलिकाएं संकरी हो जाती हैं। इस वजह से हड्डियों तक रक्त नहीं पहंुच पाता है, जिससे उन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है।
बीमारी: सिकल सेल एनिमिया और गौचर्स डिजीज जैसी चिकित्सकीय स्थिति उत्पन्न होने पर भी हड्डियों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता है। इन सबके अलावा कुछ ऐसे अनजाने कारण भी होते हैं, जिनकी वजह से यह बीमारी लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लेती है।
रिस्क फैक्टर
जोड़ों में चोट लगना या उनका क्षतिग्रस्त हो जाना जैसे कूल्हों के जोड़ का अलग हो जाना या उनका टूट जाना। इस स्थिति में भी जोड़ों के नजदीक की रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और हड्डी तक रक्त की आपूर्ति कम हो सकती है।स्टेरॉयड का इस्तेमाल। बहुत ज्यादा मात्रा में कॉर्टिकोस्टेरॉयड जैसी दवाइयों का सेवन एवैस्कुलर न्यूरोसिस होने का सामान्य कारण है।
शराब का अत्यधिक सेवन। लगातार कई वर्षों से एक दिन में कई बार शराब पीने से रक्त नलिका में वसा का जमाव हो जाता है और वे संकरी हो जाती हैं।
हड्डियों के घनत्व को बढ़ाने के लिए लंबे समय तक दवाइयों के सेवन से जबड़ों के नेकरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है।
पैंक्रिएटाइटिस, डाइबिटिज, गौचर्स डिजीज, एचआइवी/एड्स, सिस्टेमेटिक लुपस एरीथेमाटोसस और सिकल सेल सेल एनिमिया जैसी बीमारियों के होने पर भी एवैस्कुलर नेकरोसिस होने की संभावना रहती है।
Comments
Post a Comment
If you have any doubt's, please let me know